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नाथूराम गोडसे: हिंदू साम्राज्य के वीर योद्धा

गांधी वध करके भारत की युवा षक्ति में देषभक्ति की भावना जगाने वाले वीर नाथूराम एक महान क्रांतिकारी सिद्ध हुए। संघ व हिंदू महासभा में सक्रिय भूमिका और ‘हिंदू राश्ट्र‘ अखबार के प्रकाषन, हैदराबाद मुक्ति संग्राम में जेल यात्रा गोडसे के जीनव के अनेक पहलू से वर्तमान युवा पीढ़ी अनभिज्ञ है। हिंदू महासभा के अग्रिम संगठन Hindu Defense League के द्वारा शेष  भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेष नेपाल, भूटान, वर्मा, मालद्वीप, तिब्बत, अफगानिस्तान में अखंड भारत के…… हिंदू साम्राज्य के लिये आंदोलन करना है। पूर्व इतिहास में स्वाम्भुव मनु से लेकर महाराजा महाराजा युधिश्ठिर तक आर्य संस्कृति का साम्राज्य पूरे विश्व  में रहा। लगभग 200 वर्श पूर्व महाराज विक्रमादित्य ने मध्य एषिया, सउदी अरब तक हिंदू संस्कृति के आदर्ष स्वराज्य की स्थापना की। सम्राट अषोक, महाराणा प्रताप, छत्रपति षिवाजी, नेताजी सुभाशचंद्र बोस जैसे राश्ट्र नायकों का योगदान हमारा गौरवषाली इतिहास है। वीर सावरकर,……, भगतसिंह चंद्रषेखर आजाद, नाना आप्टे, वीर नाथूराम गोडसे जैसे स्वतंत्रता सेनानी ने अखंड भारत के लिये संघर्श किया। देष धर्म के लिये अगणित वीरों ने अपने बलिदान दिये।
www.NathuramGodse.in इस वेबसाइट के माध्यम से हम पं0 नाथूराम गोडसे के जीवन के राष्ट्रीय  विचारों व आंदोलन से परिचय कराना है। गोडसे की अंतिम इच्छा थी कि उनकी अस्थियां सिंधु नदी में तब प्रवाहित का जाए जब सिंधु नदी अखंड भारत का पुनः हिस्सा बन जाए। और जब तक भारत पुनः अखंड नहीं बनता तब तक पीढ़ी दर पीढ़ी मेरी अस्थियों को संभाल कर रखा जाये।
पं0 गोडसे जी के ये विचार व उनकी अस्थियां देष के भविश्य से जुड़ी हैं। और देष का भविश्य युवा पीढ़ी के हाथों में है। देष के युवा पूर्व में गांधी व कांग्रेसी नेताओं व छद्म हिंदू नेताओं की गलती को सुधारने के लिये आगे आयेंगे और भारत की सीमाओं का विस्तार करने में सेनाओं का मनोबल बढ़ायेंगे।
देष में कोई भी राजनीतिक दल व नेताओं में किसी ने भी देष को पुनः अखंड करने की बात को गंभीरता से नहीं उठाया। पर समय की आवष्यकता है कि यूरोप व अफ्रीकी देषों तथा चीन, जापान, कोरिया जैसे राज्यों के समकक्ष भारतीय संस्कृति साम्राज्य को स्थापित करने के लिये भारत को अपने खाये हुए राज्यों को किसी भी किमत पर पुनः भारत में मिलाना होगा। पं0 नाथूराम गोडसे की अस्थि राख में अखंड भारत का संकल्प छिपा है। ईश्वर हमारी मनाकामना पूर्ण करे।